option chain kya hota hai

 

ऑप्शन चेन क्या होता है?

    ऑप्शन चेन क्या है?

ऑप्शन चेन (जिसे ऑप्शन मैट्रिक्स भी कहते हैं) एक टेबल है जो किसी खास स्टॉक या इंडेक्स के सभी उपलब्ध ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की पूरी जानकारी दिखाती है। यह जानकारी एक ही जगह पर मिल जाती है, जिससे ट्रेडर आसानी से अलग-अलग स्ट्राइक प्राइस, एक्सपायरी डेट, और ऑप्शन की कीमतों (प्रीमियम) को देख सकते हैं। अगर आप स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करते हैं या करने की सोच रहे हैं, तो आपने ऑप्शन चेन का नाम ज़रूर सुना होगा। यह एक ऐसा टूल है जो ऑप्शन ट्रेडिंग की दुनिया में बहुत महत्वपूर्ण है। 

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आसान भाषा में, यह एक लिस्ट है जिसमें आप देख सकते हैं कि किस कीमत पर लोग किसी स्टॉक को खरीदने या बेचने के लिए तैयार हैं, और किस तारीख तक। यह दो मुख्य भागों में बंटा होता है: कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन

Option Chain एक ऐसी टेबल या डेटा लिस्ट होती है जिसमें किसी स्टॉक या इंडेक्स के ऑप्शन्स (Call और Put) की पूरी जानकारी होती है। इसमें अलग-अलग स्ट्राइक प्राइस (Strike Price), प्रीमियम, ओपन इंटरेस्ट, वॉल्यूम और एक्सपायरी डेट की जानकारी मिलती है।

    कॉल और पुट ऑप्शन

  • कॉल ऑप्शन (Call Option): यह खरीदने वाले को एक निश्चित कीमत पर (स्ट्राइक प्राइस) किसी स्टॉक को खरीदने का अधिकार देता है, लेकिन कोई दायित्व नहीं होता। कॉल ऑप्शन खरीदार तब लेता है जब उसे लगता है कि स्टॉक की कीमत बढ़ेगी।

  • पुट ऑप्शन (Put Option): यह खरीदने वाले को एक निश्चित कीमत पर (स्ट्राइक प्राइस) किसी स्टॉक को बेचने का अधिकार देता है, लेकिन कोई दायित्व नहीं होता। पुट ऑप्शन खरीदार तब लेता है जब उसे लगता है कि स्टॉक की कीमत गिरेगी।

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    ऑप्शन चेन में मुख्य जानकारी

ऑप्शन चेन में कुछ खास कॉलम होते हैं जो बहुत ज़रूरी होते हैं। आइए, इन्हें समझते हैं:

  1. स्ट्राइक प्राइस (Strike Price): यह वह निश्चित कीमत है जिस पर आप स्टॉक को खरीद या बेच सकते हैं। ऑप्शन चेन में स्ट्राइक प्राइस की लिस्ट बीच में होती है, जो कॉल और पुट ऑप्शन को अलग करती है।

  2. लास्ट ट्रेडेड प्राइस (LTP): यह किसी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की सबसे ताज़ा ट्रेडिंग कीमत है, जिसे प्रीमियम भी कहते हैं।

  3. ओपन इंटरेस्ट (Open Interest - OI): यह उन कॉन्ट्रैक्ट्स की कुल संख्या है जो अभी खुले हैं या बंद नहीं हुए हैं। OI बढ़ने का मतलब है कि उस स्ट्राइक प्राइस पर लोगों की रुचि बढ़ रही है।

  4. वॉल्यूम (Volume): यह दिखाता है कि एक निश्चित समय में कितने कॉन्ट्रैक्ट्स का लेन-देन हुआ है। ज्यादा वॉल्यूम का मतलब है कि उस ऑप्शन में ज्यादा लिक्विडिटी (तरलता) है।

  5. बिड और आस्क (Bid and Ask):

    • बिड: यह वह सबसे ऊंची कीमत है जो कोई खरीदार किसी ऑप्शन के लिए देने को तैयार है।

    • आस्क: यह वह सबसे कम कीमत है जिस पर कोई विक्रेता ऑप्शन बेचने को तैयार है।

Option Chain को देखकर ट्रेडर को मार्केट की दिशा (Market Sentiment) समझने में मदद मिलती है। इसमें मुख्य रूप से ये जानकारी होती है:

Strike Price (स्ट्राइक प्राइस): वह तय कीमत जिस पर ऑप्शन खरीदा या बेचा जा सकता है।

  1. Call Option (कॉल ऑप्शन): जब हमें लगता है कि स्टॉक की कीमत बढ़ेगी।
  2. Put Option (पुट ऑप्शन): जब हमें लगता है कि स्टॉक की कीमत गिरेगी।
  3. Premium (प्रीमियम): ऑप्शन खरीदने के लिए चुकाई गई कीमत।
  4. Open Interest (OI): कितने कॉन्ट्रैक्ट अभी तक खुले हुए हैं, यह दिखाता है।
  5. Volume (वॉल्यूम): कितने कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड हुए हैं।
  6. Implied Volatility (IV): मार्केट में स्टॉक के उतार-चढ़ाव की उम्मीद।

    ऑप्शन चेन को कैसे पढ़ें?

ऑप्शन चेन को समझना थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन एक बार जब आप इसके मुख्य हिस्सों को पहचान लेते हैं, तो यह आसान हो जाता है।

  1. कॉल ऑप्शन आमतौर पर ऑप्शन चेन के बाईं (left) तरफ होते हैं और पुट ऑप्शन दाईं (right) तरफ।
  2. स्ट्राइक प्राइस के कॉलम के ऊपर और नीचे कॉल और पुट ऑप्शन की जानकारी दी गई होती है।
  3. आप स्ट्राइक प्राइस, ओपन इंटरेस्ट और वॉल्यूम जैसे डेटा को देखकर यह अंदाज़ा लगा सकते हैं कि बाज़ार का रुख क्या है। उदाहरण के लिए, अगर किसी स्ट्राइक प्राइस पर कॉल ऑप्शन का ओपन इंटरेस्ट बहुत ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि लोग उस कीमत को एक प्रतिरोध स्तर (resistance level) मान रहे हैं।

Option Chain का इस्तेमाल कैसे करें?

  1. NSE India की वेबसाइट पर जाकर आप Nifty, Bank Nifty या किसी भी स्टॉक का Option Chain देख सकते हैं।

  2. ट्रेडिंग करने से पहले Call और Put दोनों साइड के Open Interest को ध्यान से देखें।

  3. अगर किसी स्ट्राइक प्राइस पर बहुत ज्यादा Put OI है → वहां Strong Support बनता है।

  4. अगर किसी स्ट्राइक प्राइस पर ज्यादा Call OI है → वहां Strong Resistance बनता है।

  5. Expiry Date का भी ध्यान रखें, क्योंकि जैसे-जैसे Expiry पास आती है, ऑप्शन का Time Value घटता है।

NSE, BSE और Option Chain

भारत में शेयर मार्केट की बात होती है तो दो नाम सबसे पहले आते हैं – NSE (National Stock Exchange) और BSE (Bombay Stock Exchange)। यही वो जगहें हैं जहां कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। दूसरी ओर, अगर आप ऑप्शन ट्रेडिंग करते हैं तो Option Chain आपके लिए बेहद ज़रूरी टूल है


    निष्कर्ष

ऑप्शन चेन एक शक्तिशाली टूल है जो ऑप्शन ट्रेडर्स को बाज़ार की दिशा, लिक्विडिटी, और संभावित समर्थन और प्रतिरोध स्तरों को समझने में मदद करता है। इसे देखकर आप अपनी ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी को बेहतर बना सकते हैं और सूचित निर्णय ले सकते हैं। हालांकि, इसे समझने के लिए प्रैक्टिस और अनुभव की जरूरत होती है।

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