option chain kya hota hai

ऑप्शन चेन क्या होता है? |

शेयर मार्केट में जो लोग ऑप्शन ट्रेडिंग करना चाहते हैं, उनके लिए “ऑप्शन चेन” को समझना बहुत ज़रूरी होता है। खासतौर पर निफ्टी, बैंक निफ्टी या किसी स्टॉक के ऑप्शन में ट्रेड करने से पहले ऑप्शन चेन की जानकारी होना आपके फ़ैसले को बेहतर बना सकता है। इस ब्लॉग पोस्ट में ऑप्शन चेन को आसान और शुद्ध हिंदी भाषा में, step by step पैराग्राफ़ के ज़रिये समझाया गया है। 

option chain kya hota hai


ऑप्शन चेन का मतलब क्या होता है?

ऑप्शन चेन एक तरह की तालिका (Table) होती है, जिसमें किसी खास स्टॉक या इंडेक्स के सभी उपलब्ध ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट दिखाई जाते हैं। इसमें कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन दोनों की पूरी जानकारी रहती है। हर स्ट्राइक प्राइस के सामने उस ऑप्शन का प्रीमियम, ओपन इंटरेस्ट, वॉल्यूम और ओपन इंटरेस्ट में बदलाव जैसे ज़रूरी आँकड़े दिए होते हैं। सरल शब्दों में कहें तो ऑप्शन चेन बाज़ार का पूरा डेटा एक ही जगह दिखा देती है।


ऑप्शन चेन कहाँ देखी जाती है?

ऑप्शन चेन आप National Stock Exchange (NSE) की आधिकारिक वेबसाइट पर आसानी से देख सकते हैं। इसके अलावा ज़्यादातर ट्रेडिंग ऐप्स और प्लेटफ़ॉर्म भी रियल-टाइम ऑप्शन चेन की सुविधा देते हैं। निफ्टी और बैंक निफ्टी की ऑप्शन चेन सबसे ज़्यादा देखी जाती है, क्योंकि इनमें ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी अधिक होती है।


ऑप्शन चेन के मुख्य हिस्से

ऑप्शन चेन को समझने के लिए उसके ढांचे को जानना ज़रूरी है। ऑप्शन चेन के बीच में स्ट्राइक प्राइस होता है। इसके बाईं ओर कॉल ऑप्शन (CE) और दाईं ओर पुट ऑप्शन (PE) दिखाए जाते हैं। हर स्ट्राइक प्राइस की एक पंक्ति होती है, जिसमें उस स्तर पर कॉल और पुट ऑप्शन से जुड़ा पूरा डेटा होता है।

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कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन का अर्थ

कॉल ऑप्शन तब खरीदा जाता है जब ट्रेडर को लगता है कि कीमत आगे चलकर ऊपर जाएगी। इसलिए जिस स्ट्राइक प्राइस पर कॉल ऑप्शन में ज़्यादा गतिविधि होती है, वह ऊपर की दिशा की उम्मीद को दर्शाता है।
पुट ऑप्शन तब खरीदा जाता है जब यह माना जाता है कि कीमत नीचे जाएगी। अगर किसी स्ट्राइक पर पुट ऑप्शन का ओपन इंटरेस्ट ज़्यादा है, तो वह बाज़ार में गिरावट की संभावना को दिखाता है।


स्ट्राइक प्राइस क्या होता है?

स्ट्राइक प्राइस वह तय कीमत होती है, जिस पर ऑप्शन खरीदा या बेचा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर निफ्टी 22,000 पर चल रहा है, तो 21,900, 22,000 और 22,100 जैसी स्ट्राइक प्राइस ऑप्शन चेन में दिखाई देंगी। जो स्ट्राइक मौजूदा बाज़ार भाव के सबसे पास होती है, उसे एट-द-मनी कहा जाता है।


ओपन इंटरेस्ट का मतलब

ओपन इंटरेस्ट ऑप्शन चेन का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। यह बताता है कि किसी खास स्ट्राइक प्राइस पर कितने कॉन्ट्रैक्ट अभी खुले हुए हैं। जिस स्ट्राइक पर ओपन इंटरेस्ट बहुत ज़्यादा होता है, वह स्तर अक्सर मज़बूत सपोर्ट या रेज़िस्टेंस की तरह काम करता है।


ओपन इंटरेस्ट में बदलाव का महत्व

ओपन इंटरेस्ट में बदलाव से यह पता चलता है कि बाज़ार में नए सौदे बन रहे हैं या पुराने सौदे खत्म हो रहे हैं। अगर कीमत के साथ-साथ ओपन इंटरेस्ट भी बढ़ रहा है, तो ट्रेंड मज़बूत माना जाता है। लेकिन अगर कीमत बढ़ रही हो और ओपन इंटरेस्ट घट रहा हो, तो यह संकेत हो सकता है कि चाल कमज़ोर पड़ रही है।

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ऑप्शन चेन से सपोर्ट और रेज़िस्टेंस कैसे समझें?

ऑप्शन चेन का सबसे ज़्यादा उपयोग सपोर्ट और रेज़िस्टेंस स्तर पहचानने में किया जाता है। जिस स्ट्राइक प्राइस पर पुट ऑप्शन का ओपन इंटरेस्ट सबसे ज़्यादा हो, वह मज़बूत सपोर्ट माना जाता है। वहीं जिस स्ट्राइक पर कॉल ऑप्शन का ओपन इंटरेस्ट अधिक हो, वह मज़बूत रेज़िस्टेंस का संकेत देता है।


ट्रेडिंग में ऑप्शन चेन का उपयोग

ऑप्शन चेन केवल देखने के लिए नहीं होती, बल्कि सही निर्णय लेने का साधन भी है। इंट्राडे या स्विंग ट्रेडर ऑप्शन चेन से यह समझ सकते हैं कि बाज़ार एक दायरे में रहेगा या ब्रेकआउट दे सकता है। ऑप्शन बेचने वालों के लिए ऑप्शन चेन और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि वे ओपन इंटरेस्ट और समय क्षय पर ज़्यादा ध्यान देते हैं।

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शुरुआती ट्रेडर्स के लिए ज़रूरी सलाह

ऑप्शन चेन को देखते समय सिर्फ़ एक ही आँकड़े पर भरोसा न करें। कॉल और पुट दोनों पक्षों को साथ-साथ देखें। साथ ही चार्ट, ट्रेंड और बाज़ार की खबरों को भी ध्यान में रखें। बिना सही जोखिम प्रबंधन के ऑप्शन ट्रेडिंग नुकसानदेह हो सकती है।


निष्कर्ष

ऑप्शन चेन ऑप्शन ट्रेडिंग की नींव है। अगर आप ऑप्शन चेन को सही ढंग से पढ़ना सीख जाते हैं, तो बाज़ार की दिशा, सपोर्ट-रेज़िस्टेंस और ट्रेडर्स की सोच को पहले ही समझ सकते हैं। शुरुआत में सीखने और अभ्यास पर ध्यान दें, फिर धीरे-धीरे वास्तविक ट्रेडिंग में कदम रखें।

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