Volume Profile Fixed Range Indicator
शेयर मार्केट में सफल ट्रेडिंग के लिए केवल प्राइस देखना काफी नहीं होता, यह समझना भी ज़रूरी है कि किस प्राइस लेवल पर कितना वॉल्यूम ट्रेड हुआ है। यहीं पर Volume Profile Fixed Range इंडिकेटर ट्रेडर को मार्केट की गहराई दिखाता है। यह इंडिकेटर प्राइस के साथ-साथ वॉल्यूम को भी ध्यान में रखकर यह बताता है कि किस लेवल पर खरीदार और विक्रेता सबसे ज्यादा एक्टिव रहे हैं।
Volume Profile Fixed Range क्या है
Volume Profile Fixed Range एक ऐसा टूल है जो किसी चुने हुए समय (Fixed Range) के अंदर हुए ट्रेडिंग वॉल्यूम को अलग-अलग प्राइस लेवल पर दिखाता है। यह सामान्य वॉल्यूम इंडिकेटर से अलग होता है क्योंकि यह समय के बजाय प्राइस पर वॉल्यूम को मैप करता है। इससे ट्रेडर को यह समझने में मदद मिलती है कि मार्केट ने किन प्राइस को ज़्यादा स्वीकार किया और किन प्राइस को नकार दिया।
Fixed Range का मतलब क्या होता है
Fixed Range का मतलब है कि आप खुद तय करते हैं कि किस पॉइंट से किस पॉइंट तक Volume Profile देखना है। यह किसी एक दिन, किसी स्विंग मूव, किसी ब्रेकआउट या किसी बड़े ट्रेंड का हिस्सा हो सकता है। यही वजह है कि यह इंडिकेटर डिस्क्रेशनरी ट्रेडर्स के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है।
Volume Profile Fixed Range कैसे काम करता है
जब आप चार्ट पर Fixed Range चुनते हैं, तो इंडिकेटर उस रेंज के भीतर हर प्राइस लेवल पर ट्रेड हुए वॉल्यूम को जोड़ता है। जहां सबसे ज्यादा वॉल्यूम होता है, वहां एक मोटी लाइन या एरिया बनता है। यही लेवल मार्केट के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि वहीं पर खरीदार और विक्रेता दोनों ने सबसे ज्यादा रुचि दिखाई होती है।
Point of Control (POC) क्या है
POC वह प्राइस लेवल होता है जहां सबसे अधिक वॉल्यूम ट्रेड हुआ होता है। यह लेवल अक्सर मजबूत सपोर्ट या रेजिस्टेंस की तरह काम करता है। जब प्राइस POC के ऊपर टिकता है तो तेजी का संकेत देता है और नीचे टिकता है तो कमजोरी दिखाता है।
Value Area High और Value Area Low का महत्व
Value Area वह ज़ोन होता है जहां लगभग 70% ट्रेडिंग वॉल्यूम हुआ होता है। इसका ऊपरी हिस्सा Value Area High और निचला हिस्सा Value Area Low कहलाता है। ये लेवल्स ट्रेडिंग के लिए बहुत अहम होते हैं क्योंकि प्राइस अक्सर इन्हीं के बीच घूमता रहता है। जब प्राइस Value Area से बाहर निकलता है, तब तेज़ मूवमेंट देखने को मिलता है।
Volume Profile Fixed Range से Support और Resistance कैसे पहचानें
यह इंडिकेटर बिना किसी अनुमान के साफ-साफ दिखा देता है कि किस लेवल पर मार्केट ने सबसे ज्यादा समय और वॉल्यूम बिताया। High Volume Nodes आमतौर पर मजबूत सपोर्ट या रेजिस्टेंस बनते हैं, जबकि Low Volume Nodes ऐसे एरिया होते हैं जहां प्राइस तेज़ी से मूव करता है।
Intraday Trading में इसका उपयोग
Intraday ट्रेडर्स Fixed Range को अक्सर मार्केट ओपन से लेकर अब तक के चार्ट पर लगाते हैं। इससे उन्हें यह समझ आता है कि आज का फेयर प्राइस क्या है और किस लेवल पर बड़े प्लेयर्स एक्टिव हैं। POC और Value Area के आसपास ट्रेड लेना रिस्क को काफी हद तक कम कर सकता है।

Swing Trading में Volume Profile Fixed Range
Swing ट्रेडिंग में यह इंडिकेटर पिछले स्विंग हाई से स्विंग लो तक लगाया जाता है। इससे यह पता चलता है कि उस पूरे मूव में किस प्राइस को सबसे ज्यादा सपोर्ट मिला। यह जानकारी एंट्री, टार्गेट और स्टॉपलॉस तय करने में बहुत मददगार होती है।
Volume Profile Fixed Range के फायदे
यह इंडिकेटर प्राइस एक्शन को गहराई से समझने में मदद करता है। यह फेक ब्रेकआउट से बचाता है और ट्रेडर को यह भरोसा देता है कि वह हाई वॉल्यूम एरिया के साथ ट्रेड कर रहा है, न कि अनुमान के आधार पर।
इसकी सीमाएं (Limitations)
यह इंडिकेटर भविष्य की भविष्यवाणी नहीं करता, बल्कि अतीत के डेटा को दिखाता है। गलत रेंज चुनने पर गलत लेवल्स मिल सकते हैं। इसलिए इसे हमेशा प्राइस एक्शन और ट्रेंड एनालिसिस के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए।
Volume Profile Fixed Range के साथ कौन-से इंडिकेटर बेहतर रहते हैं
यह इंडिकेटर Moving Average, VWAP और RSI के साथ बहुत अच्छा काम करता है। जब POC किसी Moving Average के साथ मेल खाता है, तो वह लेवल और भी मजबूत बन जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Volume Profile Fixed Range उन ट्रेडर्स के लिए बेहद शक्तिशाली टूल है जो मार्केट को सिर्फ कैंडल्स से आगे जाकर समझना चाहते हैं। यह इंडिकेटर आपको बताता है कि मार्केट ने किस प्राइस को सच में स्वीकार किया है। सही तरीके से उपयोग करने पर यह आपकी ट्रेडिंग को अधिक प्रोफेशनल और डिसिप्लिन्ड बना सकता है।

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