price oscillator indicator

Price Oscillator Indicator क्या है?

Price Oscillator Indicator एक trend-following technical indicator है, जो दो अलग-अलग समय अवधि (short-term और long-term) की moving averages के बीच का अंतर दिखाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि price अपने average से ऊपर है या नीचे, यानी मार्केट में तेजी (bullish) है या मंदी (bearish)।

शेयर बाजार या ट्रेडिंग की दुनिया में तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) का बहुत बड़ा महत्व है। सफल ट्रेडर बनने के लिए आपको केवल चार्ट देखना ही नहीं, बल्कि उन चार्ट्स के पीछे छिपे संकेतों को समझना भी आना चाहिए। इन्हीं संकेतों को पकड़ने के लिए Price Oscillator जैसे इंडिकेटर्स का उपयोग किया जाता है। चाहे आप एक इंट्राडे ट्रेडर हों या लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर, प्राइस ऑसिलेटर आपको बाजार की दिशा और गति (Momentum) को समझने में काफी मदद करता है। 

price oscillator indicator

सरल शब्दों में, जब short-term moving average, long-term moving average से ऊपर होती है, तो Price Oscillator positive होता है और जब नीचे होती है, तो negative होता है।


Price Oscillator Indicator कैसे काम करता है?

Price Oscillator दो moving averages की तुलना करता है और उनके बीच के difference को graph के रूप में दिखाता है। यह indicator अक्सर zero line के आसपास घूमता रहता है।

अगर indicator zero line के ऊपर है, तो इसका मतलब है कि short-term price momentum मजबूत है। अगर zero line के नीचे है, तो मार्केट में कमजोरी दिखाई देती है। Price Oscillator, जिसे अक्सर PPO (Percentage Price Oscillator) या APO (Absolute Price Oscillator) के रूप में जाना जाता है, एक मोमेंटम इंडिकेटर है। यह इंडिकेटर मुख्य रूप से दो अलग-अलग मूविंग एवरेज (Moving Averages) के बीच के अंतर को दर्शाता है। यह एक ऑसिलेटर है, जिसका अर्थ है कि इसकी वैल्यू एक 'जीरो लाइन' (Zero Line) के ऊपर और नीचे घूमती रहती है।

जब कम अवधि वाली मूविंग एवरेज (Short-term MA), लंबी अवधि वाली मूविंग एवरेज (Long-term MA) के ऊपर होती है, तो ऑसिलेटर पॉजिटिव क्षेत्र में होता है। इसके विपरीत, जब शॉर्ट-टर्म एवरेज लॉन्ग-टर्म एवरेज से नीचे गिरती है, तो ऑसिलेटर नेगेटिव क्षेत्र में चला जाता है। यह सरल सिद्धांत ट्रेडर्स को यह समझने में मदद करता है कि बाजार में तेजी है या मंदी।


Price Oscillator Indicator का Formula

Price Oscillator दो तरीकों से निकाला जा सकता है: इसे समझने के लिए हमें इसके गणितीय पक्ष को देखना होगा। हालांकि आजकल सभी ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर जैसे Zerodha, TradingView इसे खुद कैलकुलेट कर लेते हैं, लेकिन इसकी समझ होना जरूरी है।

1. Absolute Price Oscillator (APO)

APO = Short-Term Moving Average – Long-Term Moving Average

इसमें actual difference दिखता है, जो points में होता है।

2. Percentage Price Oscillator (PPO)

PPO = (Short MA – Long MA) / Long MA × 100

इसमें difference percentage में दिखता है, जिससे अलग-अलग stocks की तुलना आसान हो जाती है।


Price Oscillator Indicator के प्रकार

कई नए ट्रेडर्स को लगता है कि Price Oscillator और MACD (Moving Average Convergence Divergence) एक ही हैं। हालांकि ये काफी मिलते-जुलते हैं, लेकिन इनमें एक बड़ा अंतर है। MACD 'पॉइंट्स' में अंतर दिखाता है, जबकि PPO 'प्रतिशत' में।

इसका फायदा यह है कि आप PPO के जरिए दो अलग-अलग कीमत वाले शेयरों की तुलना कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, ₹100 वाले शेयर और ₹5000 वाले शेयर का MACD स्तर बहुत अलग होगा, लेकिन उनका PPO प्रतिशत आपको एक समान तुलनात्मक डेटा दे सकता है। इसलिए प्रोफेशनल ट्रेडर्स अक्सर PPO को अधिक प्राथमिकता देते हैं।

Absolute Price Oscillator (APO)

APO ज़्यादातर intraday और short-term trading में उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें exact price difference दिखता है।

Percentage Price Oscillator (PPO)

PPO long-term analysis और multiple stocks comparison के लिए ज्यादा उपयोगी होता है, क्योंकि यह percentage-based होता है।


TradingView में Price Oscillator Indicator कैसे लगाएं? (Step by Step)

  1. TradingView chart open करें

  2. “Indicators” पर क्लिक करें

  3. Search box में “Price Oscillator” लिखें

  4. Indicator select करें

  5. Default settings को पहले observe करें

  6. जरूरत अनुसार moving average period change करें

Indicator add करने के बाद यह chart के नीचे अलग window में दिखाई देगा।


Price Oscillator Indicator से Buy Signal कैसे पहचानें?

Zero Line Crossover Buy Signal

जब Price Oscillator नीचे से ऊपर की तरफ zero line cross करता है, तो यह buy signal माना जाता है।

इसका मतलब है कि short-term trend, long-term trend से तेज़ हो रहा है और price ऊपर जा सकता है।


Price Oscillator Indicator से Sell Signal कैसे पहचानें?

Zero Line Crossover Sell Signal

जब Price Oscillator ऊपर से नीचे की तरफ zero line cross करता है, तो यह sell signal होता है।

यह signal बताता है कि market में momentum कमजोर हो रहा है और price गिर सकता है।


Price Oscillator Indicator में Divergence का उपयोग

Bullish Divergence

जब price lower low बनाता है लेकिन indicator higher low बनाता है, तो इसे bullish divergence कहते हैं। यह trend reversal का संकेत देता है।

Bearish Divergence

जब price higher high बनाता है लेकिन indicator lower high बनाता है, तो bearish divergence बनती है, जो गिरावट का संकेत हो सकती है।


Price Oscillator Indicator के Best Settings

  • Intraday Trading: 12, 26

  • Swing Trading: 20, 50

  • Long-Term Trading: 50, 200

Settings market और timeframe के अनुसार बदलनी चाहिए। Fixed setting हर stock पर काम नहीं करती।


Price Oscillator Indicator को किन Indicators के साथ इस्तेमाल करें?

Price Oscillator अकेले इस्तेमाल करने से false signals मिल सकते हैं। बेहतर accuracy के लिए इसे इन indicators के साथ combine करें:

  • Moving Average

  • RSI (Relative Strength Index)

  • MACD

  • Support & Resistance

Combination से signal confirmation मजबूत होता है।


Price Oscillator Indicator के फायदे

  • Trend direction साफ दिखाता है

  • Buy/Sell signals easy होते हैं

  • Beginners के लिए समझना आसान

  • Momentum analysis में मदद करता है


Price Oscillator Indicator की सीमाएं

  • Sideways market में false signals

  • अकेले इस्तेमाल करने पर risk ज्यादा

  • Strong volatility में late signals

इसलिए हमेशा risk management और stop loss ज़रूर लगाएं।


Price Oscillator Indicator किन Traders के लिए सही है?

यह indicator intraday traders, swing traders और positional traders सभी के लिए उपयोगी है, बशर्ते सही timeframe और confirmation के साथ use किया जाए।


निष्कर्ष (Conclusion)

Price Oscillator Indicator एक powerful लेकिन simple technical tool है, जो market के momentum और trend को समझने में मदद करता है। अगर इसे सही settings, confirmation indicators और discipline के साथ use किया जाए, तो यह trading decisions को काफी बेहतर बना सकता है।

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