आरएसआई क्या है?
यह एक तकनीकी विश्लेषण उपकरण है जो किसी सुरक्षा की हालिया मूल्य परिवर्तनों की गति को मापता है, और यह निर्धारित करने में मदद करता है कि क्या यह ओवरबॉट (अधिक खरीदा गया) या ओवरसोल्ड (अधिविक्रीत) है. आरएसआई का मान 0 से 100 तक होता है। 70 से ऊपर के रीडिंग को ओवरबॉट माना जाता है, और 30 से नीचे के रीडिंग को ओवरसोल्ड माना जाता है.
RSI (Relative Strength Index) क्या है?
RSI एक momentum oscillator है, जिसे J. Welles Wilder Jr. ने बनाया था। यह किसी स्टॉक या इंडेक्स की strength और weakness को मापने के लिए प्रयोग किया जाता है।
इसकी value 0 से 100 के बीच होती है।
RSI के मूल सिद्धांत
RSI रेंज: RSI इंडिकेटर 0 से 100 के बीच होता है।
Overbought और Oversold:
जब RSI 70 से ऊपर होता है, तो यह माना जाता है कि स्टॉक overbought है और उसकी कीमत में गिरावट आ सकती है।
जब RSI 30 से नीचे होता है, तो यह माना जाता है कि स्टॉक oversold है और उसकी कीमत में उछाल आ सकता है।
डिफ़ॉल्ट सेटिंग: आमतौर पर RSI को 14 पीरियड्स (जैसे 14 दिन या 14 घंटे) के लिए सेट किया जाता है। आप अपनी ट्रेडिंग स्टाइल के हिसाब से इसे बदल सकते हैं।
RSI की सबसे आम ट्रेडिंग रणनीतियाँ
1. Overbought/Oversold क्रॉसओवर
यह सबसे सीधी और आम रणनीति है। इसमें आप RSI के 30 और 70 के स्तरों पर नज़र रखते हैं।
खरीदने का सिग्नल (Buy Signal): जब RSI 30 के नीचे जाकर फिर से 30 के ऊपर आता है, तो यह खरीदने का अच्छा मौका हो सकता है। इसका मतलब है कि बेचने का दबाव कम हो रहा है और कीमत बढ़ सकती है।
बेचने का सिग्नल (Sell Signal): जब RSI 70 के ऊपर जाकर फिर से 70 के नीचे आता है, तो यह बेचने का अच्छा मौका हो सकता है। इसका मतलब है कि खरीदने का दबाव कम हो रहा है और कीमत गिर सकती है।
RSI से Trading Strategy
✅ Overbought zone (70 से ऊपर) → Profit booking या Short Selling का मौका।
✅ Oversold zone (30 से नीचे) → Buy करने का मौका।
✅ RSI Divergence → जब Price और RSI उल्टी दिशा में चलते हैं, तब trend reversal का संकेत मिलता है।
2. RSI डाइवर्जेंस (Divergence)
यह एक बहुत ही शक्तिशाली सिग्नल है जो संभावित ट्रेंड रिवर्सल (trend reversal) को दिखाता है। डाइवर्जेंस तब होता है जब स्टॉक की कीमत और RSI की दिशा अलग-अलग होती है।
बुलिश डाइवर्जेंस (Bullish Divergence):
स्टॉक की कीमत नया निचला स्तर (lower low) बनाती है।
लेकिन RSI नया ऊंचा निचला स्तर (higher low) बनाता है।
यह सिग्नल बताता है कि नीचे की ओर की गति (bearish momentum) कमजोर हो रही है और कीमत में उछाल आने वाला है।
बेयरिश डाइवर्जेंस (Bearish Divergence):
स्टॉक की कीमत नया ऊंचा स्तर (higher high) बनाती है।
लेकिन RSI नया निचला ऊंचा स्तर (lower high) बनाता है।
यह सिग्नल बताता है कि ऊपर की ओर की गति (bullish momentum) कमजोर हो रही है और कीमत में गिरावट आ सकती है।
3. 50-Crossover
RSI पर 50 का स्तर भी ट्रेंड की दिशा जानने में मदद करता है।
उछाल वाले ट्रेंड (Uptrend) में: RSI अक्सर 50 के ऊपर रहता है। जब RSI 50 के नीचे से 50 के ऊपर जाता है, तो यह एक मजबूत अपट्रेंड की पुष्टि करता है।
गिरावट वाले ट्रेंड (Downtrend) में: RSI अक्सर 50 के नीचे रहता है। जब RSI 50 के ऊपर से 50 के नीचे जाता है, तो यह एक मजबूत डाउनट्रेंड की पुष्टि करता है।
RSI का इस्तेमाल कैसे करें?
सिर्फ RSI पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि यह कभी-कभी गलत सिग्नल भी दे सकता है। इसे अन्य इंडिकेटर्स के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना सबसे अच्छा होता है।
RSI + मूविंग एवरेज (Moving Averages): पहले मूविंग एवरेज का उपयोग करके ट्रेंड की पहचान करें। अगर ट्रेंड ऊपर की ओर है, तो सिर्फ RSI के बुलिश सिग्नल (overbought कंडीशन) पर ध्यान दें।
RSI + Bollinger Bands: जब स्टॉक की कीमत ऊपरी Bollinger बैंड को छूती है और RSI 70 से ऊपर होता है, तो यह एक बहुत ही मजबूत सिग्नल हो सकता है कि कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई है और उसमें गिरावट आ सकती है।
ट्रेडिंग में सफलता के लिए यह समझना ज़रूरी है कि कोई भी एक इंडिकेटर 100% सही नहीं होता। इसलिए, हमेशा जोखिम प्रबंधन (risk management) का पालन करें और अपनी खुद की रिसर्च करें।
Formula of RSI
जहाँ
RS = Average Gain / Average Loss (14 periods में)

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