Open Interest (OI) Indicator क्या है?
शेयर बाजार, विशेष रूप से फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) की दुनिया में, 'Open Interest' (ओपन इंटरेस्ट) एक ऐसा शब्द है जिसे हर सफल ट्रेडर इस्तेमाल करता है। अगर आप भी ट्रेडिंग में अपनी जीत की संभावना बढ़ाना चाहते हैं, तो सिर्फ प्राइस चार्ट देखना काफी नहीं है। आपको यह समझना होगा कि बाजार के खिलाड़ी (Market Participants) अपना पैसा कहाँ लगा रहे हैं और उनकी पोजीशन क्या है। यही वह जगह है जहाँ Open Interest Indicator आपकी मदद करता है।
इस ब्लॉग पोस्ट में, हम विस्तार से जानेंगे कि ओपन इंटरेस्ट क्या है, यह वॉल्यूम से कैसे अलग है, और आप इसका उपयोग करके मार्केट के ट्रेंड को कैसे पहचान सकते हैं। शेयर मार्केट और डेरिवेटिव्स (F&O) ट्रेडिंग में Open Interest Indicator एक बहुत ही महत्वपूर्ण टूल माना जाता है। यह खासतौर पर Futures & Options ट्रेड करने वाले ट्रेडर्स के लिए बेहद उपयोगी होता है। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि मार्केट में नया पैसा आ रहा है या निकल रहा है, तो Open Interest (OI) आपकी मदद करता है।
इस ब्लॉग में हम Open Interest Indicator को Step by Step, आसान भाषा में और SEO + AI Friendly तरीके से समझेंगे।
Open Interest (OI) क्या होता है? (What is Open Interest in Hindi
ओपन इंटरेस्ट का सीधा अर्थ है—बाजार में 'खुले हुए' या 'सक्रिय' कॉन्ट्रैक्ट्स की कुल संख्या। जब हम डेरिवेटिव्स (Futures & Options) की बात करते हैं, तो हर सौदे में एक खरीदार (Buyer) और एक विक्रेता (Seller) होता है। जब ये दोनों मिलकर एक नया कॉन्ट्रैक्ट बनाते हैं, जो अभी तक सेटल या बंद (Square off) नहीं हुआ है, तो उसे 'ओपन इंटरेस्ट' कहा जाता है।
सरल शब्दों में, ओपन इंटरेस्ट हमें यह बताता है कि कितने कॉन्ट्रैक्ट्स फिलहाल मार्केट में एक्टिव हैं। यह बाजार की लिक्विडिटी और ट्रेडर्स की दिलचस्पी को मापने का एक बेहतरीन पैमाना है।
Open Interest और Volume के बीच अंतर (Difference Between OI and Volume)
कई नए ट्रेडर्स ओपन इंटरेस्ट और वॉल्यूम को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से ये दोनों बहुत अलग हैं:
वॉल्यूम (Volume): यह एक निश्चित समय (जैसे एक दिन) में ट्रेड किए गए कुल कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या है। यदि आपने 5 कॉन्ट्रैक्ट खरीदे और 5 बेचे, तो वॉल्यूम 10 हो जाएगा। वॉल्यूम हर दिन जीरो से शुरू होता है।
ओपन इंटरेस्ट (OI): यह केवल उन कॉन्ट्रैक्ट्स को गिनता है जो अभी भी 'ओपन' हैं। यह दिन के अंत में जीरो नहीं होता, बल्कि अगले दिन के लिए कैरी फॉरवर्ड होता है।
उदाहरण के लिए:
अगर ट्रेडर A एक नया कॉन्ट्रैक्ट खरीदता है और ट्रेडर B उसे बेचता है, तो OI +1 बढ़ेगा।
अगर ट्रेडर A अपना कॉन्ट्रैक्ट ट्रेडर C को बेच देता है (जिसके पास पहले कोई पोजीशन नहीं थी), तो OI में कोई बदलाव नहीं होगा, क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट बस एक हाथ से दूसरे हाथ में गया है।
अगर ट्रेडर A और B दोनों अपनी पोजीशन बंद कर देते हैं, तो OI -1 कम हो जाएगा।
Open Interest कैसे काम करता है? (How Open Interest Works)
ओपन इंटरेस्ट का बढ़ना या घटना बाजार में पैसे के प्रवाह (Money Flow) को दर्शाता है। इसे समझने के लिए नीचे दी गई तालिका देखें:
| प्राइस (Price) | ओपन इंटरेस्ट (OI) | व्याख्या (Interpretation) | मार्केट सेंटीमेंट |
| ऊपर (Up) | ऊपर (Up) | Long Buildup | बुलिश (Bullish) |
| नीचे (Down) | ऊपर (Up) | Short Buildup | बेयरिश (Bearish) |
| ऊपर (Up) | नीचे (Down) | Short Covering | बुलिश रिवर्सल (Bullish Reversal) |
| नीचे (Down) | नीचे (Down) | Long Unwinding | बेयरिश रिवर्सल (Bearish Reversal) |
स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: ट्रेडिंग में OI Indicator का उपयोग कैसे करें
ट्रेडिंग रणनीतियों में ओपन इंटरेस्ट का उपयोग करने के लिए आप इन स्टेप्स का पालन कर सकते हैं:
स्टेप 1: सही टूल्स का चुनाव करें
अधिकांश ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म (जैसे Zerodha, Angel One, या Fyers) में इंडिकेटर सेक्शन में 'Open Interest' का विकल्प होता है। आप इसे अपने चार्ट के नीचे वॉल्यूम की तरह लगा सकते हैं। इसके अलावा, आप NSE की वेबसाइट पर 'Option Chain' के माध्यम से भी OI डेटा देख सकते हैं।
स्टेप 2: ट्रेंड की पुष्टि करें (Trend Confirmation)
यदि स्टॉक की कीमत बढ़ रही है और साथ ही ओपन इंटरेस्ट भी बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि बाजार में 'Long Buildup' हो रहा है। नए खरीदार बाजार में आ रहे हैं और वे ऊंची कीमतों पर भी पोजीशन बनाने को तैयार हैं। यह एक मजबूत अपट्रेंड का संकेत है।
स्टेप 3: रिवर्सल को पहचानें (Identifying Reversals)
अगर कीमत ऊपर जा रही है लेकिन ओपन इंटरेस्ट गिर रहा है, तो सतर्क हो जाएं। इसे 'Short Covering' कहते हैं। इसका मतलब है कि लोग नई खरीदारी नहीं कर रहे, बल्कि पुराने सेलर्स अपनी पोजीशन काट रहे हैं। ऐसी स्थिति में ट्रेंड कभी भी पलट सकता है।
स्टेप 4: सपोर्ट और रेजिस्टेंस का पता लगाएं (Support & Resistance)
ऑप्शन चैन (Option Chain) में जिस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज्यादा 'Call Open Interest' होता है, वह एक मजबूत रेजिस्टेंस (Resistance) की तरह काम करता है। इसी तरह, जिस स्ट्राइक प्राइस पर सबसे ज्यादा 'Put Open Interest' होता है, वह एक मजबूत सपोर्ट (Support) माना जाता है।
ऑप्शंस ट्रेडिंग में ओपन इंटरेस्ट का महत्व
ऑप्शंस ट्रेडिंग में OI का डेटा सोने की खान की तरह है। यहाँ 'Option Writing' (सेलिंग) के नजरिए से डेटा को देखा जाता है क्योंकि बड़े इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स (FIIs/DIIs) आमतौर पर ऑप्शंस सेल करते हैं।
High Call OI: अगर किसी स्ट्राइक प्राइस पर बहुत ज्यादा कॉल राइटिंग है, तो बड़े प्लेयर्स को लगता है कि मार्केट उस लेवल के ऊपर नहीं जाएगा।
High Put OI: अगर पुट साइड पर भारी ओपन इंटरेस्ट है, तो इसका मतलब है कि वह लेवल एक लक्ष्मण रेखा है जिसके नीचे मार्केट के जाने की संभावना कम है।
महत्वपूर्ण लिंक और रिसोर्सेज (Important Links)
अपनी रिसर्च को और बेहतर बनाने के लिए आप इन आधिकारिक वेबसाइट्स का उपयोग कर सकते हैं:
[suspicious link removed] - रियल-टाइम OI डेटा के लिए।
- एडवांस्ड OI एनालिसिस और विज़ुअलाइज़ेशन के लिए।Sensibull - चार्ट पर OI इंडिकेटर का उपयोग करने के लिए।TradingView
OI इंडिकेटर का उपयोग करते समय सावधानियां
ओपन इंटरेस्ट एक शक्तिशाली टूल है, लेकिन इसे अकेले इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है। हमेशा ध्यान रखें:
सिर्फ OI पर भरोसा न करें: इसे हमेशा प्राइस एक्शन, RSI या मूविंग एवरेज जैसे अन्य टेक्निकल इंडिकेटर्स के साथ मिलाकर उपयोग करें।
लिक्विडिटी चेक करें: कम लिक्विडिटी वाले स्टॉक्स में OI डेटा अक्सर भ्रामक (False Signals) हो सकता है।
एक्सपायरी का ध्यान रखें: एक्सपायरी के करीब OI डेटा बहुत तेजी से बदलता है, जिसे 'Rollover' कहा जाता है। इस समय डेटा को बहुत सावधानी से पढ़ना चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
Open Interest Indicator बाजार की मनोवैज्ञानिक स्थिति (Market Psychology) को समझने का एक शानदार जरिया है। यह आपको भीड़ से अलग सोचने और बड़े खिलाड़ियों की चाल को पहचानने में मदद करता है। यदि आप इसे सही तरीके से मास्टर कर लेते हैं, तो आपकी ट्रेडिंग एक नए स्तर पर पहुँच सकती है।
अभ्यास के लिए, कल के मार्केट सेशन में निफ्टी या बैंक निफ्टी के चार्ट पर OI इंडिकेटर लगाकर देखें कि प्राइस मूवमेंट और OI के बीच क्या संबंध बन रहा है।
प्रो टिप: हमेशा 'Change in OI' (एक दिन में हुआ बदलाव) पर ध्यान दें, यह आपको मौजूदा मार्केट सेंटीमेंट के बारे में ज्यादा सटीक जानकारी देगा।


0 टिप्पणियाँ