Option Chain क्या है?
✍️ ऑप्शन चेन क्या है?
शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करने वालों के लिए Option Chain (ऑप्शन चेइन) एक बेहद जरूरी टूल है। यह हमें बताता है कि मार्केट में कितने ट्रेडर्स Call Option या Put Option में दांव लगा रहे हैं। साथ ही इसमें Buy-Sell, Lot Size, Strike Price और Premium जैसी सारी जानकारियाँ होती हैं। नए ट्रेडर्स अक्सर ऑप्शन ट्रेडिंग से कन्फ्यूज हो जाते हैं, इसलिए आज हम आपको आसान भाषा में समझाएंगे कि ऑप्शन चेइन क्या है और इसमें क्या-क्या होता है।
ऑप्शन चेन (Option Chain) एक टेबल (तालिका) होती है जो किसी खास शेयर या इंडेक्स के सभी उपलब्ध ऑप्शंस (options) की पूरी जानकारी एक ही जगह पर दिखाती है। यह इन्वेस्टर्स को यह समझने में मदद करता है कि बाजार में किसी स्टॉक या इंडेक्स की वर्तमान मांग और आपूर्ति क्या है।
इस टेबल में आप बहुत सारी जानकारी देख सकते हैं, जैसे:
स्ट्राइक प्राइस (Strike Price): वह कीमत जिस पर आप किसी शेयर को भविष्य में खरीद या बेच सकते हैं।
एक्सपायरी डेट (Expiry Date): वह तारीख जिस दिन ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की समय सीमा खत्म हो जाती है।
कॉल ऑप्शंस (Call Options): ये एक अधिकार देते हैं, लेकिन दायित्व नहीं, कि आप किसी खास कीमत पर कोई स्टॉक खरीद सकते हैं।
पुट ऑप्शंस (Put Options): ये एक अधिकार देते हैं, लेकिन दायित्व नहीं, कि आप किसी खास कीमत पर कोई स्टॉक बेच सकते हैं।
ओपन इंटरेस्ट (Open Interest): यह बताता है कि कुल कितने कॉन्ट्रैक्ट्स अभी तक सेटल नहीं हुए हैं।
वॉल्यूम (Volume): यह दिखाता है कि एक दिन में कितने कॉन्ट्रैक्ट्स का ट्रेड हुआ है।
Option Chain क्या है?
Option Chain एक टेबल की तरह होता है जो किसी स्टॉक या इंडेक्स (जैसे Nifty, Bank Nifty) के सारे Call और Put Options को एक जगह दिखाता है। इसमें आपको ये सारी जानकारी मिलती है:
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Strike Price
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Call Option Premium
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Put Option Premium
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Open Interest (OI)
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Volume
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Lot Size
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Expiry Date
👉 आसान शब्दों में कहें तो, Option Chain आपको ये बताता है कि मार्केट में ज्यादा ट्रेडर्स किस तरफ (Call या Put) बेटिंग कर रहे हैं।
Call Option और Put Option क्या होते हैं?
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Call Option 👉 जब आपको लगता है कि किसी स्टॉक या इंडेक्स की कीमत बढ़ेगी, तो आप Call Option खरीदते हैं।
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Example: अगर Nifty अभी 22,000 पर है और आपको लगता है यह बढ़कर 22,200 होगा, तो आप Call Option खरीद सकते हैं।
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Put Option 👉 जब आपको लगता है कि किसी स्टॉक या इंडेक्स की कीमत गिरेगी, तो आप Put Option खरीदते हैं।
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Example: अगर Reliance अभी ₹3,000 पर है और आपको लगता है यह गिरेगा, तो आप Put Option खरीद सकते हैं।
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Option Chain में क्या-क्या होता है?
Option Chain में कई कॉलम्स होते हैं। चलिए आसान भाषा में समझते हैं:
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Strike Price: वह प्राइस लेवल जिस पर आप Call या Put खरीद सकते हैं।
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Premium: Option खरीदने के लिए जो रकम देनी पड़ती है।
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OI (Open Interest): कितने लोग उस Strike Price पर अभी पोजीशन लिए बैठे हैं।
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Volume: आज कितने Contracts का ट्रेड हुआ है।
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Change in OI: आज की Buying-Selling का हिसाब।
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IV (Implied Volatility): मार्केट में अनिश्चितता की रफ्तार।
👉 इन सब डेटा से आप समझ सकते हैं कि मार्केट किस दिशा में जा सकता है।
Buy और Sell कैसे करते हैं?
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Buy Call Option 👉 अगर मार्केट ऊपर जाएगा तो Call खरीदो।
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Buy Put Option 👉 अगर मार्केट नीचे जाएगा तो Put खरीदो।
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Sell Call Option 👉 अगर आपको लगता है कि मार्केट ज्यादा ऊपर नहीं जाएगा तो Call बेचो।
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Sell Put Option 👉 अगर आपको लगता है कि मार्केट ज्यादा नीचे नहीं जाएगा तो Put बेचो।
👉 ध्यान रहे, Buying में Risk Limited होता है और Profit Unlimited हो सकता है, जबकि Selling में Risk ज्यादा होता है। इसलिए नए ट्रेडर्स को पहले Buying से शुरुआत करनी चाहिए।
ऑप्शन ट्रेडिंग में, बाय (Buy) और सेल (Sell) का मतलब शेयरों की खरीद-बिक्री से थोड़ा अलग होता है।
बाय करना (Buy): जब आप कोई ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट बाय करते हैं, तो आप प्रीमियम (Premium) का भुगतान करते हैं। यह प्रीमियम वह कीमत होती है जो आप उस ऑप्शन को खरीदने के लिए देते हैं। अगर आप एक कॉल ऑप्शन बाय करते हैं, तो आपको लगता है कि शेयर की कीमत बढ़ेगी। वहीं, अगर आप एक पुट ऑप्शन बाय करते हैं, तो आपको लगता है कि शेयर की कीमत घटेगी। इसमें आपका अधिकतम नुकसान केवल वह प्रीमियम होता है जो आपने भुगतान किया है।
सेल करना (Sell): जब आप कोई ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट सेल करते हैं, तो आप प्रीमियम कमाते हैं। अगर आप कॉल ऑप्शन सेल करते हैं, तो आपको लगता है कि शेयर की कीमत या तो वहीं रहेगी या घटेगी। अगर आप पुट ऑप्शन सेल करते हैं, तो आपको लगता है कि शेयर की कीमत या तो वहीं रहेगी या बढ़ेगी। ऑप्शन बेचने वाले को राइटर (Writer) भी कहते हैं। इसमें जोखिम बहुत ज़्यादा होता है, क्योंकि अगर शेयर की कीमत आपके अंदाज़ के खिलाफ जाती है, तो आपका नुकसान असीमित हो सकता है।
Lot Size क्या होता है?
Option Trading में आप 1-2 शेयर से ट्रेड नहीं कर सकते। हर स्टॉक या इंडेक्स का एक Fixed Lot Size होता है।
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Nifty का Lot Size = 50
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Bank Nifty का Lot Size = 15
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Reliance का Lot Size = 250 (उदाहरण)
उदाहरण: अगर Nifty 50 का लॉट साइज 50 है, तो आप एक बार में 50, 100, 150 (50 के गुणकों में) ही कॉन्ट्रैक्ट खरीद या बेच सकते हैं। आप 60 कॉन्ट्रैक्ट नहीं खरीद सकते। इसी तरह, Reliance का लॉट साइज 250 है। इसका मतलब है कि आप 250 शेयर के समूह में ही ऑप्शन ट्रेडिंग कर सकते हैं।
👉 मतलब अगर आप Reliance का Option खरीदते हैं और उसका Lot Size 250 है, तो आपको 250 शेयरों का Option एक साथ मिलेगा।
Option Chain से Trend कैसे पहचानें?
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अगर Call OI ज्यादा है → मार्केट गिर सकता है (Resistance बन रहा है)।
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अगर Put OI ज्यादा है → मार्केट ऊपर जा सकता है (Support बन रहा है)।
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अगर किसी Strike Price पर OI अचानक बढ़ता है → उस लेवल पर बड़ी Buying या Selling हो रही है।
👉 यही कारण है कि बड़े ट्रेडर्स और FIIs Option Chain का इस्तेमाल Trend पकड़ने के लिए करते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
Option Chain को समझना हर ऑप्शन ट्रेडर के लिए जरूरी है। इसमें आपको Call, Put, Lot Size, Premium, OI और Volume की जानकारी मिलती है, जिससे आप सही दिशा में ट्रेड कर सकते हैं। नए ट्रेडर्स को चाहिए कि वे पहले Option Chain पढ़ने की प्रैक्टिस करें और फिर धीरे-धीरे Buy-Sell करना शुरू करें।


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