choppiness index

चॉपिनेस इंडेक्स (Choppiness Index) क्या है?

शेयर मार्केट में इसका उपयोग कैसे करें

जानिए कैसे Choppiness Index से मार्केट के ट्रेंड या रेंज-बाउंड होने का पता लगाया जा सकता है

Written by: राहुल कुमार, Founder – Money for Investment | शेयर मार्केट | निवेश सलाह
Date: 13 नवंबर 2025 | Follow Us: @moneyforinvestment


Choppiness Index क्या है?

चॉपिनेस इंडेक्स (Choppiness Index) एक तकनीकी संकेतक (Technical Indicator) है जो यह बताने में मदद करता है कि मार्केट इस समय ट्रेंडिंग (Trending) है या रेंज-बाउंड (Sideways/Choppy) मूवमेंट में है।
इसे सबसे पहले Bill Dreiss ने विकसित किया था, जिनका उद्देश्य था – यह समझना कि मार्केट की कीमतों में अस्थिरता (Volatility) ट्रेंड आधारित है या सिर्फ रैंडम मूवमेंट। 
choppiness index

ट्रेडिंग की दुनिया में, एक सफल रणनीति का पहला कदम बाज़ार की स्थिति को पहचानना है। क्या बाज़ार एक स्पष्ट दिशा में बढ़ रहा है—जिसे ट्रेंडिंग बाज़ार कहते हैं—या यह बिना किसी स्पष्ट दिशा के अस्थिरता और उतार-चढ़ाव दिखा रहा है—जिसे साइडवेज़ या सीमाबद्ध (बाउंड) बाज़ार कहा जाता है? यह भेद महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ट्रेंडिंग बाज़ार में सफल होने वाली रणनीति (जैसे ब्रेकआउट या मूविंग एवरेज क्रॉसओवर) अक्सर साइडवेज़ बाज़ार में विफल हो जाती है, और इसके विपरीत। यहीं पर चॉपिनेस इंडेक्स (Choppiness Index - CI) की भूमिका आती है। CI एक शक्तिशाली तकनीकी विश्लेषण उपकरण है जिसे यह मापने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि किसी परिसंपत्ति की कीमत कितनी "चौपी" (Choppy) यानी अव्यवस्थित है। यह मोमेंटम (Momentum) या वॉल्यूम (Volume) को नहीं मापता, बल्कि यह केवल यह निर्धारित करता है कि बाज़ार एक पैटर्न (ट्रेंड) का अनुसरण कर रहा है या अनियमित "शोर" (Market Noise) दिखा रहा है। CI का मान 0 से 100 के बीच होता है: कम CI मान (0 के करीब) एक मजबूत दिशात्मक ट्रेंड की उपस्थिति का संकेत देते हैं, जो ट्रेंड-फ़ॉलोइंग रणनीतियों के लिए आदर्श है। इसके विपरीत, उच्च CI मान (100 के करीब) अत्यधिक चॉपिनेस और दिशा की कमी को दर्शाते हैं, जहाँ रेंज ट्रेडिंग रणनीतियाँ बेहतर प्रदर्शन करती हैं। एक ट्रेडर के लिए, CI एक फिल्टर की तरह काम करता है, जो बताता है कि उसे कब एक ब्रेकआउट पर दांव लगाना चाहिए और कब अस्थिरता कम होने और एक नया ट्रेंड स्थापित होने का इंतजार करना चाहिए। इस प्रकार, CI दिशा नहीं बताता, लेकिन यह हमें यह महत्वपूर्ण संदर्भ देता है कि क्या हमें दिशात्मक व्यापार करना भी चाहिए या नहीं, जिससे गलत व्यापारिक संकेतों को फ़िल्टर करने में बहुत मदद मिलती है। यह इंडेक्स सीधे दिशा नहीं बताता कि मार्केट ऊपर जाएगा या नीचे, बल्कि यह बताता है कि मार्केट में दिशा है या नहीं


Choppiness Index की रेंज

  • इंडेक्स का मान (Value) 0 से 100 के बीच रहता है।

  • Low Value (0–38) → मार्केट ट्रेंडिंग है (Uptrend या Downtrend चल रहा है)

  • High Value (61–100) → मार्केट चॉपी या साइडवेज है

  • मिड रेंज (40–60) → मार्केट की स्थिति बदलने की तैयारी में है

👉 यानी, अगर इंडेक्स 70 से ऊपर है तो इसका मतलब मार्केट में कोई मजबूत ट्रेंड नहीं है, और अगर यह 30 से नीचे है तो एक मजबूत ट्रेंड (ऊपर या नीचे) शुरू हो चुका है।


Choppiness Index कैसे काम करता है?

चॉपिनेस इंडेक्स को ATR (Average True Range) और Logarithmic गणना से तैयार किया जाता है।
यह पिछली कुछ अवधि (जैसे 14 दिन या 14 कैंडल्स) के हाई और लो प्राइस के बीच की वोलैटिलिटी को मापता है।

Formula (सामान्य रूप में):

CHOP = 100 * log10(Σ(ATR over n) / (HighestHigh(n) - LowestLow(n))) / log10(n)

इस फॉर्मूले में:

  • ATR मार्केट की औसत वोलैटिलिटी दिखाता है

  • HighestHigh और LowestLow पिछले n पीरियड का प्राइस रेंज है

  • जितना ज़्यादा ATR और रेंज का फर्क होगा, उतनी मार्केट ट्रेंडिंग मानी जाएगी


Choppiness Index को चार्ट पर कैसे सेट करें?

  1. किसी भी चार्टिंग प्लेटफॉर्म (जैसे TradingView या MetaTrader) पर जाएं।

  2. Indicator सेक्शन में “Choppiness Index” सर्च करें।

  3. Period को 14 या 21 पर रखें (डिफ़ॉल्ट रूप से 14 सबसे ज़्यादा उपयोग होता है)।

  4. Range को Color Code करें:

    • 0–38 → Green (Trending)

    • 61–100 → Red (Choppy/Range-Bound)


Trading Strategy के लिए उपयोग कैसे करें?

1. ट्रेंड की पहचान करें:

  • अगर Choppiness Index नीचे गिरकर 38 से नीचे आ रहा है, तो इसका मतलब है कि मार्केट एक नए ट्रेंड की शुरुआत कर रहा है।

  • इस समय Moving Average, RSI या MACD जैसे ट्रेंड-फॉलोइंग इंडिकेटर्स का उपयोग करें।

2. साइडवेज मार्केट में ट्रेड से बचें:

  • जब इंडेक्स 61 से ऊपर हो, तो मार्केट में दिशा स्पष्ट नहीं होती।

  • ऐसे समय पर स्कैल्पिंग (Scalping) या ऑप्शन सेलिंग जैसी रणनीतियाँ बेहतर हो सकती हैं।

3. ब्रेकआउट की तैयारी:

  • जब चॉपिनेस इंडेक्स धीरे-धीरे नीचे जाने लगता है और प्राइस सपोर्ट या रेजिस्टेंस के पास है,
    तो यह संकेत हो सकता है कि जल्द ही बड़ा मूव आने वाला है।


Choppiness Index के फायदे

  • मार्केट ट्रेंड और कंसॉलिडेशन की स्थिति जल्दी समझने में मदद करता है।

  • फॉल्स ब्रेकआउट से बचाता है।

  • अन्य ट्रेंड इंडिकेटर्स (जैसे ADX, RSI, MACD) के साथ मिलाकर सटीक सिग्नल देता है।


सीमाएँ (Limitations)

  • यह दिशा नहीं बताता कि मार्केट ऊपर जाएगा या नीचे।

  • छोटे टाइमफ्रेम (जैसे 1-मिनट या 5-मिनट) पर यह बहुत संवेदनशील हो सकता है।

  • अन्य इंडिकेटर्स के बिना अकेले इसका उपयोग भ्रामक हो सकता है।


निष्कर्ष (Conclusion)

Choppiness Index एक उत्कृष्ट टूल है जो यह बताता है कि मार्केट Trending Zone में है या Choppy Phase में।
अगर आप ट्रेडिंग में नए हैं, तो इसे Price Action और Volume Analysis के साथ मिलाकर इस्तेमाल करें।
यह आपको एंट्री और एग्जिट टाइमिंग बेहतर समझने में मदद करेगा।

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