share market me theta kya hota hai

Theta क्या होता है शेयर मार्केट में?


Theta का मतलब क्या है?

शेयर मार्केट में Theta (θ) ऑप्शन ग्रीक्स (Options Greeks) का एक अहम हिस्सा है। इसे "Time Decay" भी कहा जाता है। इसका सीधा अर्थ है कि जैसे-जैसे समय बीतता है, ऑप्शन (चाहे Call हो या Put) का प्रीमियम धीरे-धीरे घटता जाता है।

👉 यानी अगर स्टॉक की कीमत में कोई बड़ा बदलाव न हो, तो भी आपके ऑप्शन की वैल्यू सिर्फ समय निकलने की वजह से कम होती जाएगी। 

अगर आप ऑप्शन ट्रेडिंग (Options Trading) करते हैं या करने की सोच रहे हैं, तो आपने "थीटा" (Theta) शब्द ज़रूर सुना होगा। थीटा, ऑप्शन ग्रीक्स (Options Greeks) में से एक है, जो यह समझने में मदद करता है कि अलग-अलग कारक किसी ऑप्शन के प्रीमियम को कैसे प्रभावित करते हैं। 

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सीधी भाषा में कहें तो, थीटा यह मापता है कि समय बीतने के साथ किसी ऑप्शन की कीमत कितनी कम होती है। इसे "टाइम डीके" (Time Decay) यानी समय क्षय भी कहा जाता है।


Theta कैसे काम करता है?

किसी भी ऑप्शन का प्रीमियम दो हिस्सों से मिलकर बनता है:

  • Intrinsic Value (आंतरिक मूल्य): यह ऑप्शन का वह मूल्य है जो स्टॉक की वर्तमान कीमत और स्ट्राइक प्राइस के बीच के अंतर से तय होता है।

  • Time Value (समय मूल्य): यह वह अतिरिक्त मूल्य है जो निवेशक इस उम्मीद में देता है कि एक्सपायरी तक स्टॉक की कीमत बढ़ेगी।

थीटा इसी टाइम वैल्यू को कम करता है। जैसे-जैसे एक्सपायरी की तारीख करीब आती है, ऑप्शन की टाइम वैल्यू तेज़ी से घटने लगती है। एक्सपायरी के बिलकुल नज़दीक, यह गिरावट सबसे तेज़ होती है, क्योंकि बाज़ार में स्टॉक की कीमत में बड़ा बदलाव आने की संभावना कम होती जाती है।

  1. Time Decay का असर – Theta बताता है कि एक दिन में ऑप्शन की वैल्यू कितनी घटेगी।

  2. Expiry के करीब असर ज्यादा – जैसे-जैसे ऑप्शन की Expiry नज़दीक आती है, Theta का असर और तेज़ी से बढ़ता है।

  3. Buyer vs Seller – ऑप्शन Buyer के लिए Theta Negative होता है (क्योंकि प्रीमियम घटता है), जबकि ऑप्शन Seller के लिए ये Positive Effect होता है (क्योंकि उन्हें Time Decay से फायदा होता है)।


Theta का Example

मान लीजिए, आपने ₹100 की स्ट्राइक प्राइस वाला कोई कॉल ऑप्शन ₹500 के प्रीमियम पर खरीदा है, जिसकी एक्सपायरी (expiry) एक महीने बाद है। बाज़ार में कुछ भी न हो, यानी स्टॉक की कीमत न तो बढ़े और न ही घटे, फिर भी आपका खरीदा हुआ ऑप्शन हर दिन अपनी वैल्यू खोता जाएगा। यह वैल्यू, जो हर दिन कम होती है, वही थीटा है।

अगर किसी ऑप्शन का थीटा -0.5 है, तो इसका मतलब है कि बाक़ी सभी चीज़ें एक जैसी रहने पर भी, वह ऑप्शन हर दिन ₹0.50 की वैल्यू खो देगा।

मान लीजिए आपने एक Call Option खरीदा है जिसका Premium ₹100 है और उसका Theta -5 है।
👉 इसका मतलब है कि अगर बाकी सब कुछ समान रहा, तो हर दिन आपके ऑप्शन का प्रीमियम ₹5 घटेगा।

  • पहले दिन → ₹95

  • दूसरे दिन → ₹90

  • तीसरे दिन → ₹85

Expiry तक धीरे-धीरे प्रीमियम शून्य के करीब पहुंच सकता है।


Theta की Range क्या होती है?

  • Call और Put ऑप्शन दोनों में Theta Negative होता है

  • Seller के लिए Theta Positive Effect देता है, क्योंकि समय बीतने से उन्हें फायदा होता है।


Theta क्यों ज़रूरी है?

  1. Option Buyer के लिए – यह समझना ज़रूरी है कि Time Decay आपके Premium को लगातार कम करता है।

  2. Option Seller के लिए – Time Decay सबसे बड़ा फायदा है क्योंकि हर गुजरते दिन के साथ Premium उनकी जेब में जाता है।

  3. Risk Management के लिए – Theta को समझकर ही आप तय कर सकते हैं कि कब Option Buy करना है और कब Sell करना है।

ऑप्शन खरीदार (Option Buyer) के लिए: थीटा एक दुश्मन की तरह है। जब आप कोई ऑप्शन खरीदते हैं, तो आप टाइम वैल्यू का भुगतान करते हैं। हर दिन, यह वैल्यू थीटा के कारण कम होती जाती है। इसलिए, एक ऑप्शन खरीदार चाहता है कि उसके ट्रेड में तेज़ी से मूवमेंट आए ताकि थीटा के नुकसान को कवर किया जा सके।

ऑप्शन विक्रेता (Option Seller) के लिए: थीटा एक दोस्त की तरह है। जब आप कोई ऑप्शन बेचते हैं, तो आप प्रीमियम इकट्ठा करते हैं। थीटा के कारण, उस ऑप्शन की वैल्यू समय के साथ कम होती जाती है। अगर स्टॉक की कीमत में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है, तो ऑप्शन सेलर को थीटा की वजह से मुनाफ़ा होता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

Theta शेयर मार्केट के ऑप्शन ट्रेडिंग का एक बेहद महत्वपूर्ण Greek है। यह बताता है कि समय बीतने के साथ ऑप्शन की वैल्यू कितनी तेज़ी से घटेगी। ऑप्शन Buyer के लिए यह नुकसान का कारण बनता है, जबकि ऑप्शन Seller के लिए यह प्रॉफिट का जरिया है। अगर आप ऑप्शन ट्रेडिंग कर रहे हैं तो Theta को अच्छे से समझना बेहद ज़रूरी है।


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